टुकड़ों में बटा संसार
संसार में बिखरे टुकड़े
समय ने देखा.....
टूटे भी मन में,
जुड़े भी मन में!
अंधेरे में था दिन मेरा
उजड़ी हुई थी रात मेरी
चांद ने देखा.....
उजाला भी मन में
अंधेरा भी मन में
नफ़रत मिली अपनों से
प्यार हुआ गैरों से
दास्तां ने कहा .....
प्यार भी मन में
नफ़रत भी मन में